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दस साल में पुलिस की गोली से 2500 मौतें

    नई दिल्ली।। पिछले दस सालों में देशभर में दंगा नियंत्रण, आतंक विरोधी तथा उग्रवाद विरोधी अभियानों में पुलिस द्वारा गोली चलाने से 2500 से अधिक आम नागरिकों की मौत हुई है एवं 4,000 से अधिक लोग घायल हुए हैं। सबसे अधिक आम नागरिकों की मौत उत्तरप्रदेश आंध्रप्रदेश, जम्मू एवं कश्मीर, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ एवं मध्यप्रदेश में हुई थी। जबकि गोवा, हिमांचल प्रदेश, नागालैंड सिक्किम एवं दिल्ली को छोड़कर सभी केंद्र शासित प्रदेशों में पुलिस गोलीकांड से किसी भी आम नागरिक की मौत नहीं हुई थी। वर्ष 2013 में सबसे अधिक 5०.4 फीसदी पुलिस फायरिंग दंगा नियंत्रण, 27.8 प्रतिशत आतंक विरोधी एवं उग्रवाद विरोधी अभियानों के लिए 18.1 फीसदी अन्य एवं 3.6 फीसदी डकैती विरोधी अभियानों से संबंधित थी।
   यदि राज्यवार आंकड़ों पर नजर डाली जाय तो देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तरप्रदेश में पिछले दस सालों में पुलिस फायरिंग की संख्या 743 लोगों की मौत हुई थी जबकि घायलों की संख्या 783 थी वहीं आंध्रप्रदेश में पुलिस की गोली से मरने वालों की संख्या 274 तथा 89 आम नागरिक घायल हुए थे। आतंकवाद प्रभावित राज्य जम्मू एवं कश्मीर में विभिन्न अभियानों के दौरान 245 लोगों की मौत हुई थी घायलों की संख्या 1०67 तक पहुंच गई थी। महाराष्ट्र में पुलिस फायरिंग से पिछले दस सालों में 243 लोग मारे गये थे तथा 351 घायल हुए थे। नक्सल प्रभावित राज्य छत्तीसगढ़ में पुलिस फायरिंग से 188 लोगों की मौत हुई थी तथा घायलों की संख्या 164 थी। मध्यप्रदेश में इतने ही समय में पुलिस द्वारा गोली चालन की घटना से 1०6 लोगों की मौत हुई थी तथा घायलों की संख्या 19 थी। देशभर में पिछले दस सालों में कुल 2527 लोगों की मौत हुई थी जबकि 446० आम नागरिक घायल हुए थे।